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Padma Shri Award 2026: राजस्थान के तीन गौरव रत्नों को मिला राष्ट्रीय सम्मान

लोक कला, जनकल्याण और संस्कृति के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान को मिली पहचान

राजस्थान | 2026
राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सेवा को वर्ष 2026 में पद्मश्री सम्मान के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिली है। राज्य से जुड़े तीन विशिष्ट व्यक्तित्वों को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री अवॉर्ड देने की घोषणा की गई है। यह सम्मान लोक संगीत, जनजातीय कला और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
भपांग लोक वाद्य के साधक गफ्फरुद्दीन मेवाती जोगी को पद्मश्री
भरतपुर जिले के डीग क्षेत्र निवासी गफ्फरुद्दीन मेवाती जोगी को राजस्थान के दुर्लभ लोक वाद्य भपांग को जीवंत बनाए रखने और देश-विदेश में लोकप्रिय करने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने ‘पांडुन का कड़ा’ जैसे पारंपरिक लोकगीतों को संरक्षित कर लोक संगीत को नई पहचान दिलाई। उनके योगदान से भपांग वादन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच मिला।
अल्गोजा वादक तगा राम भील को राष्ट्रीय सम्मान
जैसलमेर क्षेत्र के तगा राम भील को आदिवासी लोक वाद्य अल्गोजा के माध्यम से जनजातीय संस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुँचाने के लिए पद्मश्री सम्मान प्रदान किया जाएगा। देश-विदेश में की गई प्रस्तुतियों से उन्होंने राजस्थान की लोक कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
स्वामी ब्रह्मदेव जी महाराज को समाजसेवा के लिए पद्मश्री
श्रीगंगानगर, राजस्थान के स्वामी ब्रह्मदेव जी महाराज को समाजसेवा, नैतिक मूल्यों के प्रचार और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री से नवाज़ा गया है। उनका जीवन सेवा, सद्भाव और सामाजिक जागरूकता का प्रेरक उदाहरण रहा है।
राजस्थान की संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान
तीनों विभूतियों को मिला यह सम्मान राजस्थान की लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा प्रदान करता है। राज्यभर में इस घोषणा के बाद कलाकारों, सामाजिक संगठनों और आमजन में हर्ष का माहौल है।

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